

विद्यार्थियों को निर्देश
विद्यार्थियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सभी जगह और सभी समय भद्रता का व्यवहार करें। अभिभावकों से आशा है कि वे अपने बच्चों के चरित्र-निर्माण में हमेशा सहयोग करें। बच्चे जैसे-जैसे निचली कक्षाओं से ऊपर की कक्षाओं में पहुँचेंगे वैसे-वैसे अधिकाधिक सुअवसर प्रदान किए जाएंगे कि वे बाहर से थोपे गए अनुशासन की अपेक्षा आत्म-अनुशासन अपनाएँ।
समय की पाबंदी, उपस्थिति की नियमितता, पोशाक की स्वच्छता, साफ-सुथरापन, अध्ययन और गृह-कार्य के सुधार पर विद्यालय सदा बल देता रहेगा। सामाजिक आयोजनों के कारण विद्यालय से अनुपस्थिति बिल्कुल सहन नहीं की जाएगी।
1. प्रत्येक विद्यार्थी को स्कूल के सम्पूर्ण नियमों का पालन कर अनुशासित रहना होगा। अध्ययन काल में अनुशासित रहना विद्यार्थियों का परम कर्तव्य है। शान्त वातावरण में ही गम्भीर अध्ययन संभव है।
2. सद्व्यवहार करना, माता-पिता एवं गुरुजनों का आदर करना, ईमानदारी तथा सच्चाई का बर्ताव रखना विद्यार्थी का पुनीत कर्त्तव्य है। छात्रों को यह याद रखना चाहिए कि उनका नेक चरित्र एवं अनुशासन ही विद्यालय का स्वरुप एवं मापदण्ड है।
3. सदैव स्वच्छ एवं साफ सुथरे कपड़े पहनकर विद्यालय आयें तथा विद्यालय प्रांगण स्वच्छ रखने से सहयोग करें।
4. आम सभा में, कक्षा में या कक्षा से बाहर जाते समय पूर्ण मौन रहे यद्यपि अध्यापक रहें या न रहें।
5. प्रार्थना सभा की पहली घण्टी लगते ही सभी छात्र/छात्राओं को प्रार्थना स्थल पर जाने के लिए पंक्तिबद्ध रूप से शान्तिपूर्वक अपने कक्षा बाहर खड़े होना है। प्रार्थना सभा में समय से उपस्थित होना अनिवार्य है।
6. विद्यालय सम्पत्ति की सुरक्षा करना हर छात्र/छात्रा का उत्तरदायित्व है। किसी भी चीज की क्षति या तोड़ फोड़ करने पर दण्डित मूल्य होगा, तथा उनकी सुरक्षित धनराशि निरस्त कर दी जाएगी।
7. सभी छात्रों को अपनी प्रत्येक वस्तु पर विशेष ध्यान देना होगा। उसके खो जाने पर विद्यालय उत्तरदायी नहीं होगा।
8. रद्दी, कागज, जूठन आदि चीजें इधर-उधर नहीं फेंकना है, बल्कि कक्षा में रखे कूड़ेदान में ही डालना चाहिए।
9. शिक्षक कक्ष तथा दूसरे कक्षाओं में बिना आदेश के छात्रों का प्रवेश निषेध है।
10. प्रत्येक छात्र को प्रतिदिन समय से विद्यालय में उपस्थित होना आवश्यक है, कक्षोन्नति/परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए छात्र की कम से कम 90% उपस्थिति अनिवार्य है।
11. अनुशासनहीनता/उद्दण्डता करने वाले छात्रों को कभी भी विद्यालय में स्थान नहीं मिलेगा।
12. छुट्टी/अवकाश के लिए प्रधानाचार्य से पूर्व स्वीकृत लिखित प्रार्थना-पत्र देकर प्राप्त करना आवश्यक होगा।
13. सभी छात्र/छात्राओं को सहपाठ्यक्रम के अतिरिक्त प्रार्थना सभा, आम सभा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, खेल-कूद तथा अन्य पाठ्यक्रमों में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी, इससे कोई भी छात्रा वंचित नहीं रह सकता।
14. लगातार 15 दिन तक अनुपस्थित रहने पर छात्र का नाम निरस्त कर दिया जाएगा। पुनः प्रवेश हेतु निर्धारित शुल्क जमा करना होगा।
15. अपने आचरण एवं बोली में विनम्रता बरतें। सबके प्रति विनम्र एवं दयालु बनें एवं माता/पिता तथा गुरुजनों का आदर करें।
16. कक्षाध्यापक के आने तक सभी छात्र अपनी सीट पर खड़ें रहेंगे। कक्षाध्यापक का पांच मिनट तक इन्तजार करने पर कक्षानायक प्रधानाचार्य को सूचित करेंगे। कक्षा संचालन के समय कोई भी छात्र/छात्रा बरामदे/प्रागंण में घूमते हुए दिखाई नहीं देवे। कक्षा परिवर्तन, प्रयोगशाला में जाते समय कृपया शान्त होकर जायें।
17. सत्र के प्रारम्भ में कक्षाध्यापक, प्रधानाचार्य की अनुमति से सच्चरित्र, सदगुणी मेधावी कक्षानायक का चुनाव करेंगे। कक्षा की स्वच्छता का पाठ्य सामग्री चॉक, झाड़न आदि उसके द्वारा कक्षा में समय-समय पर उपलब्ध करानी होगी। अच्छा कार्य प्रस्तुत करने पर अध्यापक ग्रुप को अंक प्रदान कर प्रोत्साहित करेंगे।
18. पाठ्य पुस्तक/पाठ्य सामग्री के अतिरिक्त कोई भी छात्र ट्रांजिस्टर रेडियो, पाकेट बुक्स, पत्रिका, कॉमिक्स आदि वस्तुयें विद्यालय में नहीं लायेंगे।
19. विद्यालय का नाम ऊँचा करने के लिए छात्रों को अपने चारित्रिक, बौद्धिक सांस्कृतिक क्रिया-कलापों एवं खेल-कूद आदि का प्रदर्शन कर प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभानी होगी।
20. परीक्षा में नकल या अनुचित साधन का प्रयोग करने वाले छात्रों का परीक्षाफल प्रधानाचार्य के अधीन होंगे।
21. प्रत्युतर/विवरण आदि अभिभावक द्वारा लिखकर स्वहस्ताक्षर कर डायरी विद्यालय में जमा करनी होगी।
अभिभावकों को परामर्श
आप केे बच्चों की सर्वोत्तम शिक्षा के लिए विद्यालय के अधिकारियों और आप अभिभावकों का अधिकतम सहयोग आवश्यक है। हमारा विशेष परामर्श है कि माता-पिता और अभिभावक अपने बच्चों की डायरी प्रतिदिन अवश्य देखें और सुनिश्चित कर लें कि अगले दिन के लिए दिया गया कार्य उन्होंने पूरा कर दिया है। बच्चों को प्रोत्साहित करें कि सफाई बरतने की उन्हें आदत हो जाए, गन्दगी कभी सहन नहीं करें। डायरी में दी गई टिप्पणी नियमित रुप से देखिए और अपने हस्ताक्षर करना मत भूलिए।
यदि आपको लगे कि आपके बच्चों की प्रगति संतोषजनक नहीं है तो प्रधानाध्यापक से मिलिए। यदि वास्तव में आप के बच्चे को सहायता की आवश्यकता हो तो प्रधानाध्यापक के द्वारा सहायता की व्यवस्था हो सकती है।
बच्चे की उपस्थिति में उसके अध्यापक/विद्यालय की आलोचना कभी नहीं करें क्योंकि ऐसा करने से अध्यापक के प्रति बच्चे की श्रध्दा में कमी आती है, फलतः वह अध्यापक से सीखना नहीं चाहता। यदि कोई उचित शिकायत हो तो किसी प्रतिशोध की शंका के बिना प्रधानाध्यापक से मिलिए।
अपने बच्चे की बढ़ती उम्र के साथ उसका मार्ग-दर्शन कीजिए कि वह अपने परिवार और देश का कुशल सदस्य बने, अपने काम और पढ़ाई में स्वावलम्बी हो। बच्चे को सिखाइये कि वह अपने कमरे को साफ रखें, अपना बिस्तर सजाकर रखे, अपने जूते स्वयं पॉलिश करें, अपना बस्ता खुद उठाए आदि। जीवन के आरंभिक काल में ही ऐसी आदतें उनमें काम के प्रति गरिमा की भावना उत्पन्न करती हैं जो सफल जीवन के लिए व्यक्ति का बुनियादी गुण है।
मात्रा सामाजिक आयोजनों के कारण विद्यालय से छात्रा की अनुपस्थिति से उसकी पढ़ाई पर बुरा असर होता है, नियमित रूप से काम करने की भावना की उपेक्षा होती है, फलस्वरुप अपने अध्ययन में वह असफल हो जाता है।
हर शिशु का प्रथम विद्यालय होता है, माता-पिता की गोद। विद्यालय परिवेश होता उसका अपना घर। प्रथम शिक्षक होते हैं माता-पिता। शिशु के शिक्षा के क्षेत्र में माता-पिता का स्थान अनिर्वचनीय है।
1. सभी माता-पिता/अभिभावक अपने बच्चों को अनुशासित रखकर नियमित रूप से विद्यालय भेजें। सभी कार्य-कलापों में सक्रिय भूमिका निभाकर विद्यालय अधिकारियों का सहयोग प्रदान करें।
2. छात्रा की प्रगति के बारे में प्रधानाचार्य से परामर्श लें।
3. गृह-कार्य एवं कक्षा कार्य पूरा न करने वाले छात्रों को दण्डित किया जायेगा।
4. विद्यालय अवधि में छात्रों से मिलने की अनुमति नहीं है। नाश्ता, भोजन इत्यादि केवल मध्यावकाश के समय में ही दिया जा सकता है।
5. अनुशिक्षित (Private Tution) प्रोत्साहन नहीं दिया जाता है। विद्यालय के किसी अध्यापक द्वारा ट्यूशन लेने की अनुमति नहीं है। इसके बदले सभी अभिभावक बच्चों की पढ़ाई में व्यक्तिगत रूप से ध्यान देकर जहाँ तक सम्भव हो सके, उनकी सहायता करने का कष्ट करें।
6. विद्यालय द्वारा दी गई सूचना का प्रत्युत्तर एक सप्ताह के अन्दर प्राप्त न होने पर छात्रा का नाम काट कर घर भेज दिया जायेगा।
7. अभिभावकों के शिकायत/सुझाव/प्रार्थना पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जायेगा। परन्तु प्रधानाचार्य या किसी धी स्टाफ के साथ असभ्य व्यवहार करने की दशा में छात्रा/अभिभावक/परिवार के लागों को विद्यालय में स्थान नहीं दिया जायेगा।
8. माता-पिता/संरक्षक अपने बच्चे के समक्ष विद्यालय/शिक्षक/स्टाफ की निन्दा न करें क्योंकि इससे विद्यार्थियों का मन विद्यालय/शिक्षकों के प्रति कलुषित होगा। कलुषित मन विद्या ग्रहण नहीं कर सकेगा।
9. किसी भी प्रार्थना पत्रा को संरक्षक के हस्ताक्षर के बिना स्वीकार नही किया जाएगा।
10. अभिभावक को ध्यान देना चाहिए कि उनके अभिभाव्य की अनुपस्थिति 10% से अधिक न होने पावें।
11. प्रगति-पत्र पर अभिभावक का हस्ताक्षर होना आवश्यक है, अभिभावक को चाहिए कि स्वयं प्रगति-पत्र को प्राप्त करें।
12. प्रातःकाल समय पर बच्चों को जगाना, प्रार्थना कराना, सफाई पर विशेष ध्यान देना, समय पर भोजन (घर का बना पौष्टिक भोजन) देकर विद्यालय भेजना इन बातों पर अभिभावक विशेष ध्यान दें।
13. बच्चों के पास कॉपी, किताब उपयुक्त मात्रा में है या नहीं इस पर समय-समय पर जाँच करना हर एक अभिभावक का निजी कर्त्तव्य है।
14. जो विद्यार्थी विशेष किसी कारणवश वार्षिक परीक्षा देने में असमर्थ होते हैं तो उचित कारण ज्ञात होने पर उनकी प्रोन्नति पर विचार किया जाएगा।