

विद्यालय का मुख्य उद्देेश्य अज्ञान रुपी अंधकार में ज्ञान रुपी प्रकाश को भरना है। छात्रों में प्रेम, ज्ञान, सेवा की भावना तथा मानवीय विकास पर बल दिया जाता है। विद्यालय का मुख्य लक्ष्य बचपन से ही बच्चों में सुन्दर स्वभाव, आत्मनिर्भर, अनुशासन, स्वास्थ्य, समग्र विचारधारा, कर्त्तव्य परायणता, निःस्वार्थ भाव, निडरता, साहस तथा उत्साह आदि गुणों का समावेश करना है, जिससे छात्र/छात्रायें भविष्य में ईश्वर, देश व मानव जाति का सुयोग्य सेवक बन सकें। ईश्वर और मानव की सेवा करने में उन्हें दक्ष बनाना इस विद्यालय का परम उद्देश्य है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए ये उपाय अपनाए जाते हैं।
❖ छात्रों को सहायता प्रदान करना कि वे परिपक्वता प्राप्त करें और आध्यात्मिक दृष्टिवाले चरित्रवान व्यक्ति बने।
❖ उन्हें प्रोत्साहित करना कि वे प्रत्येक क्षेत्रा में श्रेष्ठता की प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील हों।
❖ उन्हें सहायता दी जाए कि वे अपनी स्वतंत्रता का मूल्य समझें और विवेक सहित इसका प्रयोग करें।
❖ वे निः स्वार्थ भाव से लोक-सेवा करें।
❖ वे अपने देश में अपेक्षित परिवर्तन के अग्रदूत बनें।
इस प्रकार यह विद्यालय, वर्तमान सामाजिक स्थिति में मौलिक परिवर्तन हेतु अपना सहयोग देने में प्रयत्नशील हैं ताकि भारतीय संविधान में समाहित सामाजिक न्याय, अवसर की समानता, सच्ची स्वतंत्रता, धार्मिकता तथा सदाचार के मूल्यों के सिध्दांतों की विजय हो और सभी के लिए पूर्ण मानवीय जीवन जीने का द्वार खुल जाए।
शिक्षा का माध्यम
बच्चे की मातृ-भाषा को उसकी शिक्षा का माध्यम बनाने से निश्चय ही स्वाभाविक लाभ है। स्वतंत्रता के पश्चात् सरकार द्वारा नियुक्त सभी महत्वपूर्ण आयोगों ने सुझाव दिया है कि बच्चे की मातृ-भाषा शिक्षा के आरंभिक वर्षों में शिक्षा का सर्वोत्तम माध्यम हो सकती है। इसीलिए शिक्षा का माध्यम हिन्दी है। इसके साथ ही अंग्रेजी के यथेष्ठ ज्ञान पर प्राथमिकता दी जाती है। श्रेणी LKG से, आगे की श्रेणियों में सामान्य ज्ञान, गणित, विज्ञान की पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी रहेगी।