

शिक्षा एक सतत् और रचनात्मक प्रक्रिया है। मानव प्रकृति में निहित क्षमताओं को विकसित करना और समाज की समृद्धि एवं प्रगति हेतु उनकी अभिव्यक्ति का संयोजन करना ही शिक्षा का लक्ष्य है। शिक्षा ही सामाजिक बदलाव का एक उपकरण है।
आज की शिक्षा का उद्देश्य मानव जाति को ‘‘ईश्वरीय अनास्था, अज्ञानता, संशयवृत्ति तथा आन्तरिक संघर्ष से मुक्त करना है। स्कूल चारदीवारों वाला एक ऐसा भवन है, जिसमें कल का भविष्य छिपा है। मनुष्य तथा मानव जाति का भाग्य क्लासरूम में गढ़ा जाता है। प्रत्येक बालक धरती का प्रकाश है, किन्तु उसे उद्देश्यपूर्ण अर्थात् भौतिक, सामाजिक एवं अध्यात्मिक प्रकार की संतुलित शिक्षा न मिली तो वह धरती का अंधकार भी बन सकता है, इसलिए उद्देश्यपूर्ण शिक्षा को अधिक महत्व देते हुए बचपन से ही उसे भौतिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक शिक्षा देते हैं ताकि वह अपने बच्चों को सामाजिक परिवर्तन का स्वतःनियुक्त प्रतिनिधि बन सके।
जीवन पथ, हर व्यक्ति पथिक है, बस चलते ही जाना है।
कर्म प्रखर, उद्देश्य लगन हित कधी नहीं अलसाना है।
उक्त काव्य पंक्तियाँ किसी कर्मवीर के मौलिक जीवन उददे्श्य का शाश्वत् सत्य उदघोषित कर रही हैं। ज्ञानोदय इण्टर कालेज बेलवनिया की स्थापना व उसका विकास कुछ ऐसे ही लगनशील कर्मवीरों की तपस्या का परिणाम है।
गोरखपुर कैथोलिक धर्मप्रांत के कुशीनगर जिले के उत्तरी सीमा पर छितौनी पडरौना मार्ग पर छितौनी से 3 किमी0 दक्षिण बेलवनिया ग्राम में ज्ञानोदय विद्यालय सन् 1987 में भूतपूर्व धर्माध्यक्ष डोमिनिक कोक्काट (C.S.T.) की प्रेरणा से स्व0 फादर जॉन मरिया वियानी (ओ. एफ. एम. कॉफ) द्वारा स्थापित हुआ। प्रारम्ध में यह विद्यालय शिशु मन्दिर के नाम से संचालित हुआ। बाद में ज्ञानोदय प्राथमिक विद्यालय के नाम से विकसित हुआ जिसकी मान्यता सन् 1992 में ज्ञानोदय प्राथमिक एवं शिशु मन्दिर के नाम से प्राप्त हुई। पुनः विकास के दौरान सन् 2002 में यह विद्यालय ज्ञानोदय लघु माध्यमिक विद्यालय बेलवनिया, कुशीनगर के नाम से मान्यता प्राप्त किया। उत्तरोत्तर विकास के फलस्वरूप इस विद्यालय की हाई स्कूल की मान्यता वर्ष 2003 में प्राप्त हुई। क्षेत्र के बच्चों और अभिभावकों के आग्रह पर इस विद्यालय में इण्टर विज्ञान वर्ग की कक्षाएँ सन् 2012 में प्रारम्भ हुई।
इसमें कक्षा LKG से XII तक की पढ़ाई होती है। यह विद्यालय ‘‘कैथोलिक डायोसिस ऑफ गोरखपुर एजुकेशन सोसाइटी’’ द्वारा संचालित है। प्रबन्धक, प्रधानाचार्य, अध्यापकों तथा स्थानीय जनता के सहयोग से यह विद्यालय बहुत कम ही समय में अच्छी शिक्षा, अनुशासन एवं बालकों के सर्वांगीण विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर है। अपनी स्थापना के शैशवावस्था से लेकर अब तक यह विद्यालय इस ग्रामीण अंचल में विद्या के प्रकाश का दीपक जलाये हुए सतत् सेवा पथ पर अग्रसर है। ‘‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’’ का ध्येय वाक्य इस संस्था के प्रखर उद्देश्य का उदबोधित हुआ नये कीर्ति स्तंभों को स्थापित करता चला आ रहा है।
